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भोगी की सब्जी और बाजरेकी रोटी।


भोगी की सब्जी और बाजरेकी रोटी महाराष्र्ट का पारंपारिक पदार्थ है।जिनमें बहुत आहारमूल्य है जो सदियों से यहां की प्राकृतिकी संस्कृति है।बहुत-से प्रान्तों में इस प्रकारके खाद्य-पदार्थ जाड़े के मौसम में बनाएं जाते हैं।यह पदार्थ केवल स्वादिष्ट ही नहीं होते हैं बल्किॅ  आहारमुल्योंसे भरे हुए रहते हैं। इसलिए उनको आहार तत्वोंसे भरपूर अविभाज्य पदार्थ माना जाता है।                                  

 

भोगीकी सब्जी इस  मौसममें मिलनेवाली हरी तथा अन्य सब्जियाॅं खुशबुदार मसालोंके साथ पकाई जाती है।यह व्यंजन आहार तत्वोंका खजाना है। जैसे पालक,मेथी के हरे पत्ते और बाकी मौसमी सब्जियाॅं जीवनसत्व,क्षार,और फायबरका बड़ा स्त्रोत है।जिससे वह समतोल आहार बन जाता है।हल्दी,जीरा,राई के दानोंसे न केवल स्वाद बढता बल्कि यह मसाले आहारतत्वोंकाभी स्त्रोत हैंं। इनमें ॲंटीऑक्सीडंट और सुजनविरोधी गुणभी है।              


भोगीकी सब्जीके साथ अक्सर बाजरेकी रोटी खाई जाती है।बाजरा एक आहारत्वोंसे भरपूर ग्लुटेन विरहित धान है।यह प्रथिन,तंतू,और अनेक सूक्ष्मजीवतत्वोंसे भरा है, जैसे लोह,मॅगनेशियम,और फाॅस्फरस। रक्तशर्करा की सीमा मर्यादित रखने केलिए यह उपयुक्त है।बाजरेकी रोटी बनाने में कम-से-कम प्रक्रिया कि जाती है जिससे उनके आहारतत्वोंका नाश नहीं होता इसलिए यह बारीक पीसें हुए गेहूंके आटे को अच्छा पौष्टिक बदलाव है।हरे पत्तों की सब्जी और बाकी मौसमी सब्जियाॅं और बाजरेकी रोटीसे  समतोल आहार मिलता है,जैसे पिष्टपदार्थ,प्रदान,जरूरी जीवनसत्त्व और क्षार।यह खानेसे न केवल खानेकी तृप्ती होती है ,बल्कि पेटभरका खाना होता है और शरीर को आवश्यक आहारतत्वोंकी जरुरत पुरी हो जाती है।                                     

भोगी के ,धानकटाईके मौसमके बाद मकरसंक्रांति आती है।यह प्रकृती ने इस मौसम में दिए हुए धन-धान्य और जमिनकी उत्पत्तीका त्योहार है।इस त्योहारमें तीलगूड,गजक और रेवडी जैसे पकवान बनाएं जाते हैं।जिनका मूल व्यंजन गूड है।इससे पदार्थ को मीठापन,पिष्टपदार्थ,और स्निग्ध पदार्थ,तिल और सिंगदाना स्निग्धपदार्थ,प्रथिने, और सुक्ष्म आहारतत्व,जैसे कॅल्शियम अधिक मात्रा में है।घी से स्निग्धपदार्थ और रूची मिलती है।इन सबको मिलाकर जाड़े के मौसम में शरीरको आवश्यक आहारमुल्य मिलते हैं।                   

यह पदार्थ महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत है।जो इस मिट्टीकी कृषी परंपरा और महाराष्ट्र की संस्कृति का जतन करती है।

भोगीकी सब्जी,बाजरेकी रोटी और तिलगूड यह सिर्फ पौष्टिक खाद्य-पदार्थ नहीं तो महाराष्ट्र की जमिनमें उगनेवाली, पारंपारिक आहारकी अच्छी सोच और महाराष्ट्र की संस्कृति है।


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